File Extension in Hindi, फाइल एक्सटेंशन क्या है? What is the File Extension in Hindi

What is File Extension?, What is File Format and Its Types, फाइल एक्सटेंशन क्या है?

File Extension या फाइल नेम एक्सटेंशन वह शब्द होता है, जो किसी भी फाइल के नाम के अंत में आता है। इसे फाइल फॉर्मेट भी कहते हैं। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी वीडियो का नाम New Song.mp4 है, तो इसका File Extension .mp4 है।
types of file extension
File Extension, ऑपरेटिंग सिस्टम (Operating System) को यह बताता है कि इस फाइल का फॉर्मेट क्या है, और इसे कैसे चलाना है? File Extension की शुरुआत ‘.’ डॉट के साथ होनी चाहिए और डॉट के बाद कुछ अक्षर होने चाहिए।
ज्यादातर फाइल एक्सटेंशन (What is the File Extension) तीन अक्षर के होते हैं। उदाहरण के तौर पर, .mp4, .3gp, .mp3, .png, .jpg, .txt, .psd आदि।


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आप देख सकते हैं, कि किसी भी फाइल के एक्सटेंशन (File Extension in Hindi) को देखकर आप फाइल के फॉर्मेट के बारे में बता सकते हैं। आप फाइल एक्सटेंशन को देखकर ये बता सकते हैं कि फाइल किस सॉफ्टवेर पर बनी है
आप फाइल एक्सटेंशन का प्रयोग कर विडोंज में एक ही प्रकार की फाइलों को सर्च कर सकते हैं, मान लीजिये विंडोज में आपको mp3 फाइल सर्च करना है, तो सर्च बाक्‍स में केवल .mp3 टाइप कीजिये और Enter कीजिये आपके कंप्‍यूटर की सभी mp3 फाइलें सर्च में आजएँगी। 
कुछ महत्वपूर्ण फाइल एक्सटेंशन (Some Important File extensions)
  • वीडियो – .mpeg, .avi, .flv, .wmv, .mp4, .3gp, .mkv
  • पिक्‍चर – .bmp, .jpeg, .gif, .png, .tiff, .wmf, .ico
  • ऑडियो – .mp3, .wav, aac, midi, mod, mpeg-1, m4a, flac
  • पीडीफ – .pdf
  • ऑफिस – .docx – वर्ड डॉक्यूमेंट, .xlsx – एक्सेल वर्कबुक, .pptx – पॉवरपॉइंट प्रेजेंटेशन
  • फोटोशॉप – .psd फोटोशॉप
  • कोरेल-ड्रा – .cdr कोरेल फाइल

Files and Folder, File and Folder Management, Difference Between File and Folder

File Management in Hindi, What is File? फाइल क्या है?
कंप्यूटर को दो भागों में बाटा गया है पहला सॉफ्टवेयर और दूसरा हार्डवेयर। सॉफ्टवेयर जिसमे डॉक्यूमेंट आदि होते हैं और खुद सॉफ्टवेयर भी एक फाइल कहलाती है. फाइल हमारी Audio के फॉर्म में भी हो सकती है, Video के फॉर्म में भी, Notes के फॉर्म में, Word, Pdf, Excel, Photo, आदि के फॉर्म में भी हो सकती है.

उदाहरण 1: मान लीजिये कि आपको कोई Software Install करना है तो जब आप उसे कंप्यूटर पे डालते हैं, चाहे डाउनलोड करते हैं तो उसका जो रूप होता है वो एक फाइल का ही रूप माना जाता है.

उदाहरण 2: यदि आप कोई फिल्म कंप्यूटर में सेव करना चाहते हैं तो वो भी एक फाइल है जो वीडियो के फॉर्म में होगी. इसलिए हम कह सकते हैं कि कंप्यूटर में कोई भी Document, Software, Photo, Video आदि फाइल ही होते हैं.
file and folder management

What is Folder? फोल्डर क्या है?
कंप्यूटर में कुछ पीले रंग के Icon बने होते हैं जिनमे हम अपनी मन चाही चीजे सेव कर के रख सकते हैं. Folder कहलाते हैं. यदि आपको बहुत सारी इमेज एक साथ कंप्यूटर में स्टोर करनी है तो उसके लिए आप एक फोल्डर बना सकते हैं जिसमे आप अपनी सारी फोटो सेव कर सकते हैं.



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इसे बनाने के लिए सबसे पहले आपको स्क्रीन पे खाली जगह पे Right Click करना होता है जिसमे कई सारे Option आते है जिनमे से New पे जाके दूसरे पेज पे फोल्डर लिखा होता है उसपे क्लिक करना होता है. जिसके बाद आपका एक फोल्डर बन जाता है. इसे आप अपने अनुसार Rename भी कर सकते है जिसके लिए आपको फोल्डर में लिखे New Folder पे राइट क्लिक कर के उसमे रीनेम का Option आता है जहाँ पे आप जाके नाम बदल सकते है फोल्डर का अपने अनुसार नाम दे सकते हैं. Computer में फोल्डर को Directory भी कहा जाता है।
फोल्डर को हम कंप्यूटर में कहीं पर भी बना सकते हैं आप चाहे तो इसे Desktop पर बनाये या अपनी Local Disk में बनाये। फोल्डर को हम कहीं पर भी कॉपी कर सकते हैं और इसकी जितनी चाहे कॉपी बना सकते हैं।
How to Create Folder, फोल्डर कैसे बनाये?
दोस्तों फोल्डर को बनाने के कई तरीके हैं। हम इस पोस्ट में आपको सभी तरीके बतायेगे आइये शुरू करते हैं–
 1. Right Click के द्वारा New Folder बनाना
  • सबसे पहले आप जहाँ पर भी New Folder बनाना चाहते हैं उस जगह पर Mouse का दांया बटन (Right Click) दबाएं।
  • Right Click करने पर आपके सामने “Right Click Menu” खुला जाएगी।
  • यहाँ से आपको पहले New और इसके बाद Folder पर क्लिक करना है।
  • इसके बाद फोल्डर का जो नाम आप देना चाहते हैं उसे लिख दें और Enter दबाएं।
  • आपका Folder तैयार हो चुका है।
 2. Keyboard Shortcut से फोल्डर बनाये 
  • आप जहाँ पर भी New Folder Create करना चाहते हैं उस जगह पर जाएँ।
  •  फिर की-बोर्ड से Ctrl+Shift+N एक साथ दबाएँ।
  •  इसके बाद फोल्डर का जो नाम आप देना चाहते है उसे लिख दें. और Enter दबाएं।
  •  और कुछ ही पल में आपका New Folder Create हो जाएगा।



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 3. Folder के अंदर Folder बनाएं
ऊपर जो तरीका बताया गया है वह Computer में सभी Location पर Folder बनाने में काम आता है। पर आप अलग तरीके से फोल्डर के अंदर फोल्डर बनाना चाहते हैं तो –
  • जिस Folder के अन्दर Folder बनाना है उस Folder को खोलें.
  • ऊपर की तरफ Home Tab में New Folder पर क्लिक करें।
  • आप सीधे ही उस पर क्लिक करके एक नया फोल्डर बना सकते हैं।
How To Hide Folder – फोल्डर को कैसे छुपायें

अगर आप अपने फोल्डर को सब की नजरों से छुपाना चाहते हैं तो आप Folder Hide कर सकते हैं। इसके लिए आपको ये स्टेप्स फॉलो करना होगा ।
  • Folder पर Right Click करें और Properties पर जाएँ।
  • इसके Open Window में  Hidden Checkbox पर क्लिक करें।
  • Ok और फिर Apply कर दें।
  • आपका फोल्डर सब की नजरो से छुप जायेगा।
how to hide folder

ध्यान रखे की आपने फोल्डर कहा Hide किया था वरना उस फोल्डर को ढूंढने में परेशानी हो सकती है
How to Show Hidden Folder and Items – छुपाये गए फोल्डर को Show कैसे कराएँ
  • किसी एक फोल्डर को ओपन करें, और ऊपर Left Side में Organize आप्शन पे क्लिक करें
  • अब यहाँ Folder and  Search आप्शन पर क्लिक करें
  • अब ऊपर View Tab पर जाएँ
  • यहाँ पर Show Hidden files, Folders and Drives आप्शन के रेडियो बटन पर क्लिक करके Apply और Ok कर दें
  • जहाँ पर आपने Folder Hide किया था वहाँ पर Folder Show करने लगेगा
how to hide folder
  • अगर आपको Folder दोबारा Hide करना है तो यहीं पर Don’t Show Hidden files, Folders and Drives आप्शन के रेडियो बटन पर क्लिक करके Apply और Ok कर दें।

How to Install Printer, प्रिंटर कैसे इनस्टॉल करें, How To Share a Printer on A Network

How To Add a Printer in Windows 10, How To Setup and Install a Computer Printer, How to Install Printer Driver

आज के इस पोस्ट में हम बात करेंगे Printer के बारे में, की कंप्यूटर या लैपटॉप पर Printer Driver/Software को Install (How To Install Printer) कैसे करते हैं? कंप्यूटर के साथ Printer को Connect कैसे करते हैं और Printer Share (How To Share Printer) कैसे करते हैं, इसके अलावा ये भी जानेगे कि अगर Printer Uninstall (How To Uninstall Printer) करना हो तो कैसे करेंगे. शायद आपको पता होगा Printer का काम क्या है. 

adding removing and sharing printer
अगर आपको कुछ भी प्रिंट करना हो जैसे की कोई Photo या कोई File तो आपको वो Printer की मदद से Print करना होगा. अभी Market में बहुत से Brand के Printer मिलते हैं कुछ Popular कंपनियों के नाम जैसे HP, Epson, canon हैं. अगर आप Normal काम के के लिए कोई Printer लेना चाहते हैं तो आप Epson या HP का Printer ले सकते हो. लेकिन अगर आपको बहुत जादा Photo Copy निकालना है तो आप HP Laser jet 1005 MFP Printer  ले सकते हो अभी ये बहुत अच्छा Printer है. तो चलिए जानते है Printer को कंप्यूटर पर Install कैसे करते हैं? 

How To Install Printer
Step 1
Computer ON करें और OS Load होने दे पूरी तरह से.
Step 2
Printer की केबल USB Port से Connect करें. यह सब होने के बाद Printer शुरू करे .
Step 3
अब आपके पास जो Printer Driver की CD/DVD है, उसको CD/DVD Writer में डालें, जब आपकी CD/DVD शो करने लगे तो उसको Auto Run कर दें. अगर AutoRun का आप्शन न आये तो My Computer में जाकर DVD को Manually Open करें और Setup.exe फाइल पर Double Click करके ओपन करें. अब प्रिंटर का Driver Install होना शुरू हो जायगा, Printer Driver के Terms & Condition को स्वीकार करें, और Next-Next करते चले जायें, जब तक इंस्टालेशन पूरा नहीं हो जाता, अब Driver Install होने के बाद Finish पर क्लिक कर दें.

(अगर आप ने Printer Driver को इन्टरनेट से डाउनलोड किया है (How to Download Printer Driver), या आपके पास Pen Drive में Driver की फाइल है तो इन दोनों के लिए भी आपको इसी तरह से इनस्टॉल करना है)(How To Install Printer)
Step 4

Driver Install हो जाने के बाद अपने कंप्यूटर या लैपटॉप को Restart कर लें. 

How To Uninstall Printer

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Step:1 – सबसे पहले Start Button पर क्लिक कीजिए. और Start Menu से Control Panel पर क्लिक कीजिए. नीचे Screenshot देखिये –

start menu


Step:2 –  Control Panel पर क्लिक करने पर आपके सामने Control Panel खुल जाएगा. यहाँ से आप Uninstall a program पर क्लिक कीजिए. नीचे Screenshot देखिये.

control panel



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Step:3 – अब आपके सामने Computer में Install सभी Programs/Software खुल जाऐंगे. यहाँ से पहले जिस Program को हटाना चाहते है. उस पर क्लिक करके उसे Select कीजिए. फिर ऊपर बने बटन Uninstall पर क्लिक कर दीजिए. इससे आपका Software कंप्यूटर से Uninstall होने लगेगा.

uninstall a program


यहाँ आपको Uninstall के साथ-साथ Remove एवं Change बटन भी मिल सकते हैं. लेकिन आप सिर्फ Uninstall ही चुने.

Step:4 – अब आपके सामने Uninstall Process का Confirmation Dialog Box खुलेगा. यहाँ से आप Yes/Uninstall पर क्लिक करके Uninstall Process को Confirm कर दें जिससे आपका Software Successfully Uninstall हो जाये.

uninstall a priter driver

अब जैसे ही Software/Program पूरी तरह Uninstall हो जाएगा तो आपके सामने Process Complete होने का Message आ जाएगा. जहाँ से आप OK पर क्लिक कर दें. इस तरह आपके कंप्यूटर से सॉफ्टवेर/प्रोग्राम हटा सकते हैं. 

 How To Share Printer
क्या आपके पास एक से अधिक कंप्यूटर हैं, और Printer एक ही है, या फिर आपके ऑफिस में एक ही प्रिंटर है, तो आप उस प्रिंटर को शेयर कर सकते हैं.
जब हमारे पास एक से अधिक कंप्यूटर होते हैं, और वो LAN (Local Area Network), या फिर किसी अन्य Network Topology से एक साथ कनेक्ट किए गए हैं, तो इस नेटवर्क में हम एक ही Printer Share कर सकते हैं, प्रिंटर शेयर करने से आपको दूसरा प्रिंटर खरीदने की जरुरत नहीं होती है.  
तो चलिए जानते है की Printer कैसे शेयर किया जाता है.
Step:1
सबसे पहले Start Button पर क्लिक करके Control Panel पर क्लिक करें.
how to share printer
Step:2 
Control panel ओपन करने के View by: Large Icon पर क्लिक करें, Network & Sharing Center को ओपन करें.
how to share printer
Step:3
Network & Sharing Center में Advanced Sharing Settings को ओपन करें.
(Control Panel\All Control Panel Items\Network and Sharing Center\Advanced sharing settings) 
how to share printer
Step:4 
अब Network Profile में नीचे File & Printer Sharing  में Turn on File and Printer haring को Enable कर दें. 
how to share printer
प्रिंटर को शेयर करने के लिए क्या करना है, वो जानते हैं.
Step:1

Start Button पर क्लिक कर के Devices and Printers को ओपन करें. 
how to share printer
Step:2
यहाँ पर आपके कंप्यूटर में जिनते भी प्रिंटर और अन्य Devices Install होगी वो सभी दिखाई देंगी.
how to share printer
Step:3
आपको जो प्रिंटर शेयर करना है, उसपर Right Click कर के Printer Properties पर जायें.
how to share printer

Step:4

Sharing Tab में Share this printer टिक मार्क कर के Apply और OK कर दें. 
how to share printer
अब Client PC में यानी जिसको Printer Access करना है उसको नीचे दी गयी स्टेप फॉलो करनी होगी.
    • Start button पर Click करें और फिर Devices and Printers पर click करें.
    • Add a printer को सेलेक्ट करें.
    • Add a Network, Wireless or Bluetooth Printer पर click करें. 
    • अब आने वाली इंस्ट्रक्शन को फॉलो कर के Next कर दें.
      तो इस प्रकार हम ऊपर दिए हुए स्टेप को फॉलो करके कोई भी प्रिंटर इनस्टॉल और Uninstall कर सकते है और उसे नेटवर्क में शेयर कर सकते हैं.
      =-= Related Tags =-= 
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      How to Uninstall a Computer Program in Hindi, How To Remove a Computer Software, How to Install a Software

      How to Uninstall a Computer Program in Hindi, How To Remove a Computer Software, Software Ko Kaise Uninstall Kare? How To Install a Software in Hindi

      Computer में Software Install करने की पूरी जानकारी

      Computer या Laptop में Software Install करना बहुत ही आसान है. Computer में Software Install (How to Install Programs) करने की प्रक्रिया को कोई भी साधारण Computer User जान सकता है. और अपने मन पसंद Software Computer में Install कर सकता है.

      लेकिन, जितना आसान पढने में लग रहा है. शायद Software Install करना उतना आसन है नहीं. क्योंकि, New Users को Computer में Software Install (How To Install a Software) करने का तरीका नही पता होता है. इसलिए उनके लिए तो Software Install करना आसन नहीं है. लेकिन जब New User एक बार Software Install करना समझ जाता है तो उसके लिए भी बहुत आसन है. क्योकि आज-कल मोबाइल में सभी लोग Application Install (How To Install a Program) करते हैं और उसकी जरुरत ख़त्म होने पर उसे Uninstall भी कर देते है.

      add or remove programs and features
      How Install Software in Computer

      इसे भी पढ़ें : Operating System में Simple Settings कैसे करते हैं

      तो चलिए शुरू करते हैं –

      Computer में Software Install करना
      हम Computer में मुख्य रूप से दो तरीकों से Software Install कर सकते हैं.



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      CD/DVD/Pen Drive से Software Install करने का तरीका
      • सबसे पहले अपने कंप्यूटर में सॉफ्टवेयर की CD/DVD या Pen Drive को Insert कीजिए. फिर तब-तक इंतजार कीजिए जब तक आपकी CD/DVD या Pen Drive शो न हो जाये.
      • अगर आपने CD/DVD लगाया है तो आपके सामने CD/DVD से संबंधित कुछ Option खुलेंगे. जिसमें से आपको Run पर क्लिक करना है. यदि आपके सामने कोई Option नही खुलते है. तो आप My Computer या This PC में जाकर CD/DVD को Manually Open कीजिए. और यहाँ से Setup.exe फाइल या फिर Install.exe नाम की फाईल पर Mouse से Double Click कीजिए. और फिर Screen पर दिए गए निर्देशों का पालन कीजिए.
      • Double Click करने के बाद ही आपका Software Install होना शुरु हो जाएगा. यदि यहाँ आप से Administration Password या Confirmation मांगी जाती है, तो आप इसे भी पूरा कीजिए. इसके बाद Program Install होना शुरू हो जाएगा.
      • जब आपके कंप्यूटर में Software Install हो जाएगा तो उस Program का एक Shortcut आपके Desktop पर आ जाएगा. लेकिन कुछ Software का Icon डेस्कटॉप पर Automatic नहीं आता तो उसे आपको Start Menu से Manually लाना पड़ेगा. फिर उसी Icon पर क्लिक करके आप इसे चला सकते है.
      • अगर आपने Pen Drive लगाया है तो आपको My Computer से Pen Drive को Open करना है उसमे जो भी Software Install करना है उसकी Setup.exe फाइल या फिर Install.exe नाम की फाईल पर Mouse से Double Click कीजिए. और फिर Screen पर दिए गए निर्देशों का पालन कीजिए.



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      Internet से Software Download करके Install करने का तरीका
      • सबसे पहले आप जिस भी सॉफ्टवेयर को अपने Computer में Install करना चाहते है. उस प्रोग्राम के Web Page पर जाकर उसे डाउनलोड कीजिए. Program को Download करना एक Safe तरीका है.
      • जब आपका सॉफ्टवेयर Download हो जाए. इसके ऊपर Mouse से Double Click कीजिए. और On Screen निर्देशों का पालन कीजिए.
      • ऐसा करते ही Program Computer में Install होना शुरू हो जाएगा. यदि यहाँ पर भी आप से Administration Password या Confirmation मांगी जाती है, तो आप इसे भी पूरा कीजिए.
      • अब आप Program को Install होने दीजिए. जब Software Successfully Install हो जाए तो अपने Computer को Restart कर देना चाहिए जिससे सभी प्रोग्रामिंग फाइल्स सही से अपडेट हो सके. अब आपका नया सॉफ्टवेयर आपके काम करने के लिए बिल्कुल तैयार है.

      इसे भी पढ़े  – फ्री में Software Download कैसे करें? Best Websites



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      Computer Software को Uninstall करना

      जिस प्रकार Computer में Software Install करना आसान है. बिल्कुल उसी तरह Computer से Program/Software Uninstall (How to Uninstall a Program) करना भी बहुत ही आसन है. कुछ ही Steps को Follow करके हम अपने Computer से Software को Remove/Uninstall (How to Uninstall a Software) कर सकते हैं.
      Step:1 – सबसे पहले Start Button पर क्लिक कीजिए. और Start Menu से Control Panel पर क्लिक कीजिए. नीचे Screenshot देखिये –
      start menu
      Step:2 –  Control Panel पर क्लिक करने पर आपके सामने Control Panel खुल जाएगा. यहाँ से आप Uninstall a program (How To Remove a Computer Software) पर क्लिक कीजिए. नीचे Screenshot देखिये.
      control panel
      Step:3 अब आपके सामने Computer में Install सभी Programs/Software खुल जाऐंगे. यहाँ से पहले जिस Program को हटाना चाहते है. उस पर क्लिक करके उसे Select कीजिए. फिर ऊपर बने बटन Uninstall पर क्लिक कर दीजिए. इससे आपका Software कंप्यूटर से Uninstall (How To होने लगेगा.
      uninstall a program
      यहाँ आपको Uninstall के साथ-साथ Remove एवं Change बटन भी मिल सकते हैं. लेकिन आप सिर्फ Uninstall ही चुने.
      Step:4 अब आपके सामने Uninstall Process का Confirmation Dialog Box खुलेगा. यहाँ से आप Yes/Uninstall पर क्लिक करके Uninstall Process को Confirm कर दें जिससे आपका Software Successfully Uninstall हो जाये.
      uninstall a program
      अब जैसे ही Software/Program पूरी तरह Uninstall हो जाएगा तो आपके सामने Process Complete होने का Message आ जाएगा. जहाँ से आप OK पर क्लिक कर दें. इस तरह आपके कंप्यूटर से सॉफ्टवेर/प्रोग्राम हटा सकते हैं.

      आज आप लोगों ने सीखा कि कंप्यूटर में सॉफ्टवेर को Install कैसे करते हैं और Uninstall कैसे करते हैं?

      Operating System Simple Settings, Display Setting in Windows, ऑपरेटिंग सिस्टम सेटिंग

      Windows की अधिकतर सेटिंग्स Control Panel के द्वारा की जाती है। कुछ सेटिंग्स को हम बिना कण्ट्रोल पैनल में गए भी कर सकते है। कण्ट्रोल पैनल पर जाने के लिए Start Button पर क्लिक करेंगे फिर Control Panel पर क्लिक करेंगे।
      operating-system-simple-settings

      • Steps To Open Control Panel – Start Menu – Control Panel
      (Changing Display Properties) डिस्प्ले प्रॉपर्टीज बदलना 
       operating-system-simple-settings

      वॉलपेपर (Wallpaper), स्क्रीन सेवर (Screen Sever), कलर व फॉण्ट इत्यादि सभी डेस्कटॉप से सम्बन्धित Display Properties (Display Setting in Windows) हैं। डिस्प्ले प्रॉपर्टीज डायलॉग बॉक्स प्रदर्शित करने के लिए Start  → Control Panel  → Appearance and Themes  → Display पर क्लिक करेंगे। या डेस्कटॉप पर Right Click करके प्रदर्शित होने वाले मेन्यू में Personalize पर क्लिक करेंगे। इस डायलॉग बॉक्स पर स्थित प्रत्येक टैब का प्रयोग करके परिवर्तन किए जा सकते हैं।



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      (Changing System Date and Time) सिस्टम का तारीख और टाइम बदलना
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      सिस्टम की Date और Time हम नीचे दिए गए Step से सेट कर सकते हैं-

      (i) Task Bar पर स्थित घड़ी पर क्लिक करेंगे तो यहाँ पर Date और Calendar प्रदर्शित होगा, अब यहाँ पर Change Date and Time Settings पर क्लिक करेंगे। (How To Change Date and Time) इस डायलॉग बाक्स में से Date and Time, Time zone और Internet time यूजर इच्छानुसार सेट कर सकता है। सेटिंग्स को Apply करने के लिए Apply बटन पर क्लिक करेंगे। 
      (ii) Task Bar पर स्थित घड़ी पर Right Click करके Adjust Date/Time ऑप्शन पर क्लिक करके भी Date and Time Properties डायलॉग बॉक्स प्रदर्शित कर सकते हैं। 
      (iii) Control Panel विण्डो से Clock, Language and Regional ऑप्शन को चुनने पर प्रदर्शित होने वाले डायलॉग बॉक्स के दाएँ भाग मे Pick a Task के अन्तर्गत दिए गए ऑप्शन Change the Date and Time या Date and Time आइकन पर क्लिक करके, कम्प्यूटर की डेट और टाइम सेट कर सकते हैं।

      (Changing Mouse Properties) माउस की सेटिंग बदलना

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      माउस हमारे कंप्यूटर का बहुत अहम हिस्सा है, अगर कंप्यूटर के साथ माउस न दिखे तो शायद हमें कंप्यूटर को चलाने की भी नहीं सोचेंगे, तो आज इसी माउस की सेटिंग के बारे में बताऊंगा (How To Change Mouse Setting), कि आप माउस की स्पीड कैसे बढ़ा सकते हैं या पॉइंटर का डिजाईन कैसे बदल सकते है, माउस के दोनों बटन का इस्तेमाल कैसे बदल सकते है



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      • सबसे पहले अपने कंप्यूटर के कंट्रोल पैनल में जाये और वहां माउस की सेटिंग पर क्लिक करें
      • माउस वैसे तो कोई भी फोल्डर या फाइल खोलते समय Double Click से खोलता है, लेकिन कंट्रोल पैनल में ये सिंगल क्लिक पर काम करेगा
      • माउस पर क्लिक करते ही एक नई विंडो खुलेगी जहाँ माउस की सारी सेटिंग होती है .

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      • सबसे ऊपर बटन को स्विच करने की सेटिंग है . अगर इसे ऑन कर दोगे तो आपके माउस का “Left click” Right क्लिक का काम करेगा और “Right Click” Left Click की तरह काम करेगा
      • फिर डबल क्लिक स्पीड की सेटिंग है आप इस को कम या ज्यादा कर सकते है ये सेटिंग फोल्डर खोलते समय इस्तेमाल होगी, अगर आप इसकी सेटिंग फ़ास्ट पर सेट करोगे तो फोल्डर जल्दी ओपन करेगा नहीं तो थोड़ा टाइम लगेगा फिर ओपन होगा
      • अब इसके बाद Pointer Options है –
      1. सबसे पहले है Pointer Speed की सेटिंग जब आप माउस को ऊपर नीचे या लेफ्ट राइट लेके जाते है तो उसकी स्पीड कितनी होनी चाहिए, वो इस सेटिंग से कम या ज्यादा की जा सकती है



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      2. Snap To सेटिंग का मतलब है अगर आप कोई काम करें, मानलो Software Install के लिए उसके स्टेप पर क्लिक किया तो Mouse Pointer अपने आप Install नाम पर आ जायेगा, फिर जैसे ही Install पर क्लिक करोगे, तो ये Next पर आजायेगा, या अगर आपने कोई फाइल डिलीट करने के लिए उस फाइल पर क्लिक किया और की-बोर्ड से डिलीट Key दबाई, तो माउस का पॉइंटर अपने आप डिलीट नाम पर आ जायेगा
      3. Visibility में आपको अपने माउस के पीछे 2-3 पॉइंटर और दिखेंगे, जहाँ-जहाँ आप पॉइंटर को लेके जाओगे वो इसके पीछे-पीछे रहेंगे ये एक Visual Effect है
      4. अगर टाइपिंग करते समय आप पॉइंटर को छुपाना चाहते है तो इस सेटिंग को ON कर दें
      5. अगर आप चाहते है की जब भी आप की-बोर्ड से “Ctrl Key” दबाओ तो पॉइंटर की लोकेशन का पता चल जाये तो इस सेटिंग को ON कर दें
      उम्मीद करते हैं ये Article आपको पसंद आया होगा.
      ये भी देखें – 

      What is User Interface in Hindi, यूजर इंटरफ़ेस (UI) क्या है?, User Interface for Desktop and Laptops

      जब आप किसी मशीन को चलाते हैं चाहे कंप्यूटर हो, मोबाइल फोन हो या आपके घर की वॉशिंग मशीन  हो तो आपने देखा होगा वहां पर आपको कुछ निर्देश (User Interface) दिखाई देते हैं यह निर्देश फोटो के रूप में भी हो सकते हैं या किसी बटन के रूप में भी हो सकते हैं जब आप इन निर्देशों को माउस, की-बोर्ड,  टच स्क्रीन या अपने हाथों का उपयोग करके मशीन को या कंप्यूटर को कमांड देते हैं तो आपके और मशीन के बीच में संचार स्थापित होता है यानी अगर सीधे शब्दों में कहा जाए तो आपकी और मशीन की बातचीत होती है इस बातचीत को स्थापित करने में जो माध्यम होता है (What is User Interface) वही यूजर इंटरफेस कहलाता है यूज़र इंटरफ़ेस को Human Machine Interface (HMI) भी कहा जाता है। 

      user-interface-for-desktop-and-laptop


      आज के समय में कंप्यूटर और मोबाइल फोन को चलाने के लिए जो User Interface प्रदान किया जाता है उस में मुख्यत है आपका ऑपरेटिंग सिस्‍टम (Operating Systems) है जो आपको ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI) प्रदान करता है जहां पर आपको Pictures और Icons दिखाई देते हैं जिनके माध्यम से आप की-बोर्ड और माउस की सहायता से अपने कंप्यूटर में और टच स्क्रीन की सहायता से अपने मोबाइल फोन में कमांड दे पाते हैं


      ऑपरेटिंग सिस्‍टम (Operating Systems) एक सिस्टम सॉफ्टवेयर (System Software) होता है यानी ऑपरेटिंग सिस्‍टम (Operating Systems) आपके कंप्यूटर की जितनी भी आंतरिक गतिविधियां होती हैं उनको कंट्रोल करता है और यूजर को एक ऐसा इंटरफेस प्रदान करता है जिससे वह बड़ी आसानी से कंप्यूटर को ऑपरेट कर सके, ऑपरेटिंग सिस्टम कंप्यूटर के रिसोर्सेज जैसे कंप्यूटर की मेमोरी, सेंट्रल प्रोसेसिंग यूनिट, हार्ड डिस्क या के अन्य सॉफ्टवेयर को कंट्रोल करता है यह ऐसा पहला प्रोग्राम है जो कंप्यूटर के स्विच ऑन होने के बाद ROM से कंप्यूटर की मुख्य मेमोरी में लोड होता है यह प्रक्रिया बूटिंग (Booting) कहलाती है.



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      यूजर इंटरफेस का इतिहास (History of User Interface)
      • 1945 से 1968 तक बैच इंटरफ़ेस – इस समय कंप्यूटर का Power काफी कम था और यह काफी महंगे हुआ करते थे। User को कंप्यूटर काफी महंगा पड़ता था इस वजह से उस समय User Interface पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया जाता था। सॉफ्टवेयर को इस तरह रखा जाता था जिससे की वह प्रॉसेसर को सही से इस्तेमाल कर सके। (User Interface in Hindi) यूजर इंटरफ़ेस की इनपुट साइड जो होती है वह पंच कार्ड की होती है और एक तरह से उसे हम पेपर टेप भी बोल सकते हैं।
      • 1969 से लगभग 1995 तक कमांड लाइन यूजर इंटरफ़ेस – कमांड लाइन यूजर इंटरफ़ेस (Command Line Interface) में Batch Monitor को System Console से जोड़ा जाता है। यह Transaction Response देने का काम करता है जिससे की हमें जल्दी से परिणाम मिल सकें। इसमे जो सॉफ्टवेयर इस्तेमाल किए जाते हैं वह भी काफी अच्छी तरह के होते हैं जिससे की हमें काम करने में आसानी होती है।
      • 1995 से अब तक ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस – Graphical User Interface यानि की GUI यह Interface का एक ऐसा प्रकार है जो की User को Electronic Device में Interface करने की अनुमति देता है ये Icon, Text, Mouse, Touchpad, Touchscreen, Game हो सकता है यानि की Input इन Devices और Graphics से दे सकते हैं.



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      Types of User Interface – यूजर इंटरफ़ेस के प्रकार 
      • कमांड लाइन इंटरफ़ेस (CLI)
      इसमें कंप्यूटर को की-बोर्ड के माध्यम से कमांड टाइप करके इनपुट दिया जाता है और कंप्यूटर मॉनिटर पर आपको इसका आउटपुट दिखाई देता है.
      • जीयूआई (GUI)
      जीयूआई (GUI) की फुलफार्म ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस (Graphical User Interface) है जैसा कि इसके नाम में ही पता चलता है यह ऑपरेटिंग सिस्टम ग्राफिक्स पर आधारित होता है यानी आप माउस और की-बोर्ड के माध्यम से कंप्यूटर को इनपुट दे सकते हैं और वहां पर जो आपको इंटरफ़ेस दिया जाता है वह ग्राफिकल होता है, यहां पर सभी प्रकार के बटन होते हैं मेन्‍यू होते हैं, यह बहुत आसान इंटरफ़ेस होता है जिसको कोई भी यूजर बहुत आसानी ऑपरेट कर सकता है ग्राफिकल यूज़र इंटरफेस (Graphical User Interface) के आने के बाद ऑपरेटिंग सिस्टम में तेजी से विकास हुआ है.
      • अल्टरनेटिव यूजर इंटरफ़ेस –
      यह User के ध्यान को केंद्रित करने का काम करता है और किस समय पर संदेश और वार्निंग देनी है उसका ध्यान रखता है।

      • वेब यूज़र इंटरफ़ेस

      यह भी एक Graphical User Interface है जिसमें वेब पेज को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि वह इंटरनेट के माध्यम से जब किसी यूज़र के पास पहुंचे तो उसका आउटपुट बहुत बेहतरीन दिखाई दे आपके वेब पेज का लेआउट या इंटरफ़ेस आपकी वेबसाइट के लिए बहुत महत्वपूर्ण होता है
      • क्रोससिंग बेस्ड इंटरफ़ेस

      यह ग्राफिकल यूजर इंटरफ़ेस होता है जिसका प्राथमिक काम सीमाओं को उलांघना होता है और अच्छे से सक्षम रूप से काम करना होता है।

      • डाइरैक्ट मेनिपुलेशन इंटरफ़ेस

       यह एक तरह का सामान्य यूजर इंटरफ़ेस होता है जो की उपयोग को वस्तुओं को मेनिपुलेट करने में मदद करता है जिससे के लोग प्रभावी रूप से काम कर सकें।

      • टच स्क्रीन (Touchscreen) इंटरफेस

      Touchscreen टच स्क्रीन इंटरफेस मोबाइल फोन टैबलेट और एटीएम मशीन में होते हैं जहां पर आप स्क्रीन को टच करके इनपुट देते हैं और मशीन द्वारा आपको एक निश्चित आउटपुट दिया जाता है

      • हार्डवेयर यूजर इंटरफ़ेस

      आमतौर पर घर में इस्तेमाल होने वाले होम एप्लायंसेज जैसे वाशिंग मशीन, माइक्रोवेव आदि में आप बटनो के माध्यम से टच स्क्रीन के माध्यम से स्विच के माध्यम से हार्डवेयर को जो भी कमांड देते हैं वह हार्डवेयर यूजर इंटरफेस के माध्यम से दी जाती है और यह आपके किसी भी मशीन चलाने को सरल बनाती है.

      Mobile OS क्या है, What is Mobile OS in Hindi, मोबाइल OS के प्रकार

      Mobile Operating Systems, New Mobile Operating System
      आप लोगों ने ये सवाल बहुत किये होंगे, कि आपका मोबाइल कौन सा है और आपका मोबाइल Android है या नहीं. अगर Android है तो कौन सा Version है.
      क्या आप जानते है कि ये एंड्रॉइड (Android) क्या (What is Mobile OS) हैं? अगर जानते हैं तो बहुत अच्छी बात और अगर नहीं जानते तो पूरा Article पढ़िए.

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      एंड्रॉइड एक मोबाईल ऑपरेटिंग सिस्टम (Mobile Operating System) हैं. जो मोबाईल डिवाईसों को चलाता है.  



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      Mobile Operating System क्या है? – What is Mobile Operating System in Hindi?

      Mobile Operating System जिसे संक्षेप में Mobile OS भी कहते हैं, एक ऐसा OS होता हैं जिसे मोबाईल डिवाईसों जैसे – Smart Phone (स्मार्टफोन), Tablets (टेबलेट्स), तथा अन्य Handheld Devices के लिए बनाया गया है. 

      यह ऑपरेटिंग़ सिस्टम (OS) डिवाईस के हार्डवेयर पर लोड रहता हैं जिसे मोबाईल कंपनी (Manufactures) पहले से ही Install करके ग्राहक को देती हैं. इसी OS के ऊपर हमारी डिवाईस की कार्यक्षमता और Features निर्भर रहते हैं. 

      Mobile OS ही हमारे मोबाईल डिवाईसों को Manage करता है किसी मोबाईल में Installed OS ऑपरेटिंग़ सिस्टम के ऊपर हम कोई दूसरा ऑपरेटिंग़ सिस्टम लोड नहीं कर सकते हैं. मगर कुछ अपडेट Update करना  चाहे तो कर सकते हैं.

      Mobile या Tablet को Root करके एक नया ऑपरेटिंग़ सिस्टम Operating System  इंस्टॉल कर सकते हैं.

      Mobile OS के Features
      • Touchscreen
      • Wi-Fi
      • Inbuilt Modem
      • SIM Management
      • Network Management
      • Bluetooth
      • GPS – Global Positioning System
      • NFC – Near Field Communication
      • Camera
      • Voice Recorder
      • Speech Recognition
      • Face Recognition
      • Fingerprint Sensor etc.



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      कुछ प्रमुख Mobile OS के नाम और उनकी विशेषताएं

      • Android OS – यह एक ओपन सोर्स एंड्रॉइड ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसे Google द्वारा बनाया गया हैं. इसे पहली बार सन 2008 में लॉच किया गया था. यह अब तक सबसे लोकप्रिय और सबसे अधिक डिवाईसों में उपयोग होने वाला Mobile OS है.
      • iOS – इस ऑपरेटिंग सिस्टम का निर्माण iPhone निर्माता Apple Inc. द्वारा उसके अपने डिवाइसों (आईफोन) iphone, (आईपैड) ipad, (पीसी) PC आदि के लिए किया गया हैं. इसका नंबर एंड्रॉइड के बाद आता हैं.
      • Windows OS इसका नाम कौन नही जानता हैं. यह एक PC ऑपरेटिंग सिस्टम है जो मोबाईल डिवाईस के लिए भी बनाया गया है. इसे माइक्रोसॉफ्ट द्वारा बनाया गया हैं. मोबाईल डिवाइसों में इसकी लोकप्रियता का असर कुछ खास नहीं हैं.
      • Chrome OS – इसे भी गूगल द्वारा बनाया गया है. मगर इसका विकास Web Application के लिए किया गया है. और यह क्रोम ब्राउजर का मुख्य यूजर इंटरफेस प्रदाता है. इसे आप गूगल की क्रोमबुक्स में देख सकते हैं.
      • Web OS – इसे Palm द्वारा विकसित किया गया. जिसे बाद में HP द्वारा खरीद लिया गया. इसके बाद इसे LG द्वारा उसकी इंटरनेट टीवी के लिए खरीद लिया गया.
      • BlackBerry – इसे Research In Motion (RIM) द्वारा विकसित किया गया हैं. और यह ऑपरेटिंग़ सिस्टम BlackBerry Devices में काम करता था.
      • Bada यह Samsung Electronics के द्वारा develop किया गया था। Bada के तहत फरवरी 2010 में WaveS 8500 फ़ोन lauch किया गया, जो Bada OS का पहला फ़ोन था।  सैमसंग ने केवल Wave series वाले फ़ोन में ही Bada OS का इस्तेमाल किया। 



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      Mobile OS और Desktop OS के बारे में
      जैसा की हमने बताया कि एक Mobile OS केवल मोबाइल के लिए डिजाईन किया जाता हैं. लेकिन इसका ये मतलब नहीं है कि ये Desktop OS से अलग होता है. 
      आपके मोबाइल में उपलब्ध Mobile OS की क्षमता बिल्कुल Desktop OS के समान ही होती हैं. लेकिन Mobile OS में कुछ विशेष फीचर और रहते हैं जिनका अभाव एक Desktop OS में पाया जाता हैं. 
      उम्मीद करते हैं ये Article आपको पसंद आया होगा.

      Operating Systems for Desktop and Laptop in Hindi, Operating System क्या है


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      Operating Systems for Desktop and Laptop in Hindi, Operating System क्या है
      आम तौर पर Desktop या Laptop में प्रयोग किये जाने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम्स (OS) सिंगल यूजर ऑपरेटिंग सिस्टम (Single User OS) होते है, जिन्हे क्लाइंट ऑपरेटिंग सिस्टम (Client OS) भी कहा जाता है। डेस्कटॉप और लैपटॉप में सबसे जयादा प्रयोग किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम माइक्रोसॉफ्ट कंपनी द्वारा बनाया गया (Windows Operating System) विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसका प्रयोग आम तौर पर लैपटॉप तथा डेस्कटॉप में किया जाता है। दूसरे नंबर पर प्रयोग किया जाने वाला ऑपरेटिंग सिस्टम एप्पल कंपनी द्वारा डेवेलोप किया गया Mac OS है जिसका प्रयोग एप्पल कंपनी द्वारा विकसित किये गए डेस्कटॉप तथा लैपटॉप में किया जाता है। (Linux) लिनक्स भी एक लोकप्रिय ऑपरेटिंग सिस्टम है जिसका उपयोग लैपटॉप तथा डेस्कटॉप में किया जाता है, इसकी एक खास विशेषता है यह एक ओपन सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम (Open Source Operating System) है जो की मुफ्त में उपलब्ध है। लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम के विभिन्न वर्ज़न उपलब्ध है जो काफी लोकप्रिय भी है। वर्तमान में डेस्कटॉप तथा लैपटॉप में प्रयोग किये जाने वाले ऑपरेटिंग सिस्टम GUI – Graphical User Interface पर आधारित हैं. जिनमे विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम सबसे लोकप्रिय है।
      नीचे कुछ ऑपरेटिंग सिस्टम्स दिए जा रहे हैं जो सबसे  ज्यादा  लोकप्रिय हैं और Desktop या Laptop में प्रयोग किये जाते हैं.

      • Microsoft Windows
      • Apple Mac OS
      • Linux Mint
      • Fedora
      • Ubuntu
      • Chrome OS
      • DOS
      1. Microsoft Windows (माइक्रोसॉफ्ट विंडोज)
      पर्सनल कंप्यूटर (PC) चलाने के लिए माइक्रोसॉफ्ट कॉर्पोरेशन द्वारा विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया गया था। IBM-Compatible PC के लिए पहला ग्राफिकल यूजर इंटरफेस (GUI) विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम बनाया गया था, Windows OS जल्द ही कंप्यूटर बाजार पर हावी हो गया। आज कल लगभग 90 प्रतिशत PC में विंडोज के अलग अलग वर्जन चलते हैं।
      नीचे कुछ माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम्स के नाम दिए गए हैं जो बहुत लोकप्रिय हैं – 

      • Windows 95
      • Windows 98
      • Windows ME (Millennium)
      • Windows XP
      • Windows Vista
      • Windows 7
      • Windows 8
      • Windows 8.1
      • Windows 10
      2. Apple Mac OS (एप्पल मैक ऑपरेटिंग सिस्टम)
      Apple Mac OS, जिसे Macintosh भी कहा जाता है, एक Single-User OS है, जिसे Apple Inc. द्वारा बनाया और बेचा जाता हैं. Mac OS को Apple Macintosh, Apple Mac, Thin Mac एवं Fat Mac आदि नामों से भी जाना जाता हैं.
      Apple ने Macintosh को 1984 में Introduce किया था, तब से इस OS को Continually update किया जा रहा है और वहीँ साथ में काफ़ी सारे नए features को भी इसमें शामिल किया जा चुका हैं. कुछ Mac OS दिए जा रहे हैं – (जैसे की Mac OS 8, Mac OS 9).


      3. MS DOS (Microsoft Disk Operating System)
      MS DOS का फुलफॉर्म Disk Operating System होता है यानी यह एक माइक्रोसॉफ्ट के द्वारा बनाया गया ऑपरेटिंग सिस्टम है जो पहले काफी ज्यादा यूज़ किया जाता था लेकिन अब Windows Operating System आ जाने के कारण इसका प्रयोग कम हो गया है.
      आज के समय भी नए लैपटॉप में MS DOS ऑपरेटिंग सिस्टम दिया जाता है हालाकि इसका प्रयोग बहुत ही कम लोग करते है क्योंकि यह एक ऐसा ऑपरेटिंग सिस्टम है जो पूरी तरह यूजर पर डिपेंड रहता है यानी जब भी आप इसमें कोई काम करेंगे तो आपको इसे कमांड देना होता है.


      इस ऑपरेटिंग सिस्टम को विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम की तरह हर कोई नहीं चला सकता है अगर आपको इसकी पूरी जानकारी है तभी आप इसे चला सकते हैं. Snapdeal, Paytm Mall, Flipkart और Amazon जैसी ऑनलाइन शौपिंग वेबसाइट में डॉस ऑपरेटिंग के काफी सस्ते लैपटॉप मिल जाते है जिसे आप चाहे तो बाद में अपने MS DOS ऑपरेटिंग सिस्टम वाले लैपटॉप में विंडोज ऑपरेटिंग सिस्टम इनस्टॉल कर सकते हैं.
      4. Linux Operating System (लिनक्स ऑपरेटिंग सिस्टम)
      Linux को Linus Torvalds ने सन 1991 में create किया था, लिनक्स, UNIX Operating System का एक बहुत ही Popular OS है. ये एक Open Source Operating System है क्यूंकि इसकी Source Code Internet पर Free में available है. इसके साथ इसे आप बिलकुल Free में इस्तमाल कर सकते हैं, कहने का मतलब है की ये पूरी तरह से free है.
      Linux OS को UNIX OS की compatibility को नज़र में रखकर designed किया गया था. इसलिए इसकी functionality प्राय UNIX OS से मिलती-जुलती है.
      Linux की Licensing Open Source है, इसलिए Linux किसी के लिए भी free में available है. लेकिन फिर भी “Linux” नाम का trademark उसके creator, Linus Torvalds को ही जाता है. 

      Types of Operating System in Hindi, ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार

       

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      ऑपरेटिंग सिस्टम के प्रकार – Types Of Operating System

           दिन प्रतिदिन Technology बदलती जा रही है और इसके साथ सब कुछ बदल रहा है तो वैसे ही Operating System का उपयोग हर Field में बढ़ता जा रहा है जैसे रेलवे, Research, Satellite, Industry इन सभी इंडस्ट्री में बहुत तेजी के साथ कंप्यूटर का प्रयोग हो रहा है.
           नीचे Operating System प्रकार दिए जा रहे हैं –
        •  Batch Operating System
        •  Simple Batch Operating System
        •  Multi programming Batch Operating System
        •  Network Operating System
        •  Multiprocessor Operating System
        •  Distributed Operating System
        • Time-Sharing Operating System
        •  Real-Time Operating System

          1) Batch Processing Operating System

              बैच प्रोसेसिंग ऑपरेटिंग सिस्टम प्रोसेस शुरू होने से पहले एक बैच में प्रोग्राम और डाटा को एक साथ इकठ्ठा करता है.
              Batch Processing System का main function होता है की वो jobs को batch में automatically ही execute करें. इस काम में जो सबसे महत्वपूर्ण कार्य करता है वो होता है ‘Batch Monitor’ जो की main memory के low-end में स्तिथ होता है.

          2) Simple Batch System

              ये सबसे पुराने वाले system है जिसमे कोई Direct interaction नहीं था user और Computer के बिच में. इस system में user को Task या job को Process करने के लिए कोई Storage Unit में लेके आना पड़ता था और उसको Computer operator के पास submit करना पड़ता था.
             इसमें बहुत सारे Jobs को एक batch या line में Computer को दिया ज्याता था. कुछ दिनों के अंदर या फिर कुछ महीनो के अंदर वो job Process होती थी और एक output Device में Output Store होता था. ये system jobs को batch में Process करता था इसलिए इसका नाम भी batch mode operating system बोला ज्याता था.

          3) Multi Programming Batch Systems

             एक बहु-उपयोगकर्ता ऑपरेटिंग सिस्टम एक कंप्यूटर ऑपरेटिंग सिस्टम है जो कई उपयोगकर्ता को उस पर एक ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ एकल सिस्टम तक पहुँचाने की अनुमति देता है. यह आमतौर पर बड़े कंप्यूटर पर उपयोग किया जाता है.

          4) Network Operating System

          “Network Operating System” को शोर्ट में NOS बोलते हैं. ये network operating system उन computers को अपना services प्रदान करता है जो की एक network से connected होते हैं.
          इसमें आते हैं Shared File Access, Shared Applications, और Printing Capabilities.
          NOS एक ऐसा प्रकार का software होता है जो की allow करता है Multiple Computers को एक-साथ Communicate (संचार) करने के लिए, Files share करने के लिए और दूसरे Hardware Devices के साथ भी संचार करने के लिए.
          एक NOS (Network Operating System in hindi) के मुख्य रूप से दो प्रकार होते हैं : –
          Peer-to-peer (P2P) OS, जिन्हें की प्रत्येक Computer में Install किया जाता है. वहीँ दूसरा होता है एक Client-Server Model, जिसमें की एक machine होता है server और दुसरे में client software install हुआ होता है.
             Network Operating Systems के प्रकार:-
          Network Operating System मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं –

            • Peer-to-peer NOS
            • Client/Server NOS

             1. Peer-to-Peer Network Operating System users को allow करता है network resources को share करने के लिए जो की saved होते हैं common, accessible network location में. इस architecture में, सभी devices को equally treat किया जाता है functionality के हिसाब से.
            Peer-to-peer सबसे बढ़िया काम करता है छोटे से लेकर medium LANs में, साथ में इन्हें setup करना भी बहुत सस्ता होता है.
            2. Client/Server Network Operating System users को प्रदान करता है सभी resources को access करने के लिए एक server के माध्यम से. इसके architecture में, सभी functions और applications को unify किया जाता है एक file server के अंतर्गत जिसका इस्तमाल की individual client actions के द्वारा execute किया जा सके वो भी किसी भी physical location में क्यूँ न हो.
            Client/server को install करना बहुत कठिन है, वहीँ इसमें ज्यादा मात्रा की technical maintenance की जरुरत होती है. और इसमें ज्यादा खर्चा भी होता है.
            एक Network Operating System को हर दर्शा सकते हैं एक Basic OS के तौर पर जो कि Run करती हैं एक Network Device, जैसे की Router या Firewall.
            5) Multiprocessor System
            Multiprocessor system में बहुत सारे Processors एक Common Physical Memory का इस्तेमाल करते है. इसमें Computing power काफी तेज होता है. ये सारे Processor एक Operating system के under काम करते हैं. यहाँ पे कुछ इसके Advantages दिए गए हैं

            Advantages 1)  रफ़्तार बहुत ज्यादा होती है क्यूंकि Multiprocessor का इस्तेमाल होता है.
            2)  इस OS में Task को sub Task में Divide किया ज्याता है, और हर एक Sub Task को अलग अलग Processor को दिया ज्याता है, ख़ास इसी वजह से एक Task काफी कम वक्त में Complete हो जाता है.

            6) Distributed Operating System

            Distributed Operating system इस्तेमाल करने का एक ही मकसद यह है की ,ये दुनिया के पास Powerful OS है और microprocessor काफी सस्ते हो गए हैं, साथ ही Communication Technology में काफी सुधार है.
            इस advancement की वजह से अब Distributed OS को बनाया गया जिसका दाम काफी सस्ता होता है और दूर दूर वाले Computer को network के जरिये रोक के रखता है. जो की अपने आप में ही एक बड़ी उपलब्धि है.

            Advantages

            1)   इनसे Processing Fast होती है.
            2)  जो Host machine है उसके उपर Load कम होता है, क्यूंकि Load Distribute हो ज्याता है.

            7) Time Sharing Operating System

            इसमें प्रत्येक काम को सही ढंग से पूर्ण करने के लिए OS के द्वारा कुछ समय प्रदान किया जाता है, जिससे की प्रत्येक Task सही ढंग से पूर्ण हो सके. वहीँ इसमे हर यूजर सिंगल सिस्टम का इस्तेमाल करता है जिससे CPU को टाइम दिया जाता है. इस प्रकार के सिस्टम को Multitasking सिस्टम भी बोला जाता है.
            इसमें जो भी टास्क होता है वो दोनों तरह के यूजर single user और  multi user दोनों कर सकते हैं.
            प्रत्येक task को पूर्ण करने के लिए जितना समय लगता है उसे quantum बोलते है. वहीँ हर टास्क को पूर्ण करने के बाद ही OS फिर अगले टास्क को शुरू कर देता है.

            Advantages

            • इसमें OS को प्रत्येक task को पूरा करने के लिए बराबर मौका दिया जाता है.
            • आसानी से इसमें CPU idle time को कम किया जा सकता है.

             Time-sharing, operating system के उदाहरण हैं:- Unix


            8) Real-Time Operating System

            ये सबसे Advance Operating System है, जो की real-time Process करता इसका मतलब है Missile, Railway ticket Booking, Satellite छोड़ते वक्त इन सब में अगर एक Second की भी देरी हुई तो सबकुछ गया पानी में, तो ये Operating System बिलकुल भी Idle नहीं रहता.
            ये दो प्रकार के होते है,

            1. Hard Real-Time Operating System

            ये वो operating system है जो की जिस वक्त के अंदर Task Complete करने का वक्त दिया जाता है उसी वक्त के अंदर काम ख़त्म हो जाता है.
            2. Soft Real-Time
            Soft Real-Time में वक्त की पाबन्दी थोड़ी कम होती इसमें ये होता है कि अगर एक Task चल रहा है और उसी वक्त कोई दूसरा Task आजाये तो नए Task को पहले Priority दिया जाता है. 

            ये कुछ जानकारी थी Types Of Operating system in Hindi.

            उम्मीद करते हैं कि आपको ऊपर दी हुई जानकारी पसंद आई होगी.

            Basic of Operating System – CCC

            आपरेटिंग सिस्टम क्या है – What is Operating System

                आपरेटिंग सिस्टम को सिस्टम सॉफ्टवेर भी कहा जाता है. इसको छोटे नाम से ज्यादातर लोग OS बोलते है. इसको कंप्यूटर का दिल भी कहा जाता है. आपरेटिंग सिस्टम एक सिस्टम सॉफ्टवेर है, जो की User मतलब आप के और Computer Hardware के बिच में Interface जैसे काम करता है.
                जब भी आप Computer को चलाते हो तब ये OS ही आपको Computer इस्तेमाल करने का जरिया देता है. जैसे आप गाना सुनते हो, Word Document के ऊपर Double Click करते हो, तीन-चार Window खोलते हो, Keyboard में कुछ लिखते हो, और कुछ File Computer में Save करते हो तो ये सब आप बिना Operating System के कभी नहीं कर सकते.
              तो यही OS एक एसा Software है जिसकी मदद से आप अपने Computer को चलाते हो. इसलिए जब भी आप नया Computer खरीदते हो उसमे आप सबसे पहले Windows7, Window 8 या फिर Windows10 को Load करवाते हो दुकानदार से और उसके बाद आप Computer को अपने घर ले जाते हो. वरना बिना Operating System के तो कभी अपने Computer को On भी नहीं कर सकते.
            basic-of-operating-system
                ये भी एक सवाल है की इसको System Software क्यूँ बोला ज्याता है. अगर आप Computer में User Software मतलब Application Software को चलाना चाहते हो तो वो बिना OS के कभी चल ही नहीं सकते.
                OS Computer Hardware को अच्छे से इस्तेमाल करने में मदद करता है. Operating System मुख्य रूप से यही कुछ काम करता है जैसे Keyboard से कुछ Input लेता है, Instruction को Process करता है, और Output को Computer Screen पे भेजता है.
                 Operating system को आप तभी देखते हो जब Computer को On करते हो तब और जब Computer बंद करते हो. आप Game, MS word, Adobe Reader, VLC मीडिया Player, Photoshop जैसे और बोहत सारे Software Computer के अंदर रहते है इनको चलाने के लिए एक Program या बड़ा Software चाहिए जिसको हम Operating System बोलते हैं.

                 Mobile में उपयोग होने वाले OS का नाम है Android जिसके बारे में सबको पता है. आपको पता चल गया होगा के Operating System क्या है, तो चलिए इसके कुछ काम के बारे में जान लेते है.

            कुछ मुख्य ऑपरेटिंग सिस्टम जिनका प्रयोग डेस्कटॉप या लैपटॉप में किया जाता है –

            • Microsoft Windows
            • Apple Mac OS
            • Linux Mint
            • Debian
            • Ubuntu
            • Fedora
            • Chrome OS
            • DOS etc.

            ऑपरेटिंग सिस्टम के कार्य

                वैसे Computer बहुत सारे काम करता है, लेकिन सबसे पहले जब आप Computer को On करते हो तब Operating System पहले Main Memory मतलब RAM में load होता है और इसके बाद ये User Software को कौन-कौन से Hardware चाहिए वो सब Allocate करता है. नीचे OS के अलग अलग काम दिए गए हैं, उनके बारे में और Detail में जानते हैं.
            • Memory Management
            • Processor management (Process Scheduling)
            • Device Management
            • File Management
            • Security
            • System Performance देखना
            • Error बताना
            • Software और User के बिच में तालमेल बनाना

              1. Memory Management

                Memory Management का मतलब है Primary Memory और Secondary Memory को Manage करना. Memory में बहुत सारे छोटे छोटे खाचें होते हैं जहाँ पे हम कुछ data रख सके हैं. जहाँ पे हर एक खाचें का Address होता है. Main Memory सबसे तेज चलने वाला Memory है जिसको CPU Direct इस्तेमाल करता है. क्यूंकि CPU जितने भी Program को चलता है वो सब Main Memory में ही होते हैं.
            Operating System ये सारे काम करता है.
            • Main Memory का कौन-सा हिसा इस्तेमाल होगा, कौन-सा नहीं होगा, कितना होगा, कितना नहीं होगा.
            • Multiprocessing में OS decide करता है की किस Process को Memory दिया जायेगा और किसको कितना दिया जायेगा.
            • जब Process Memory मांगती है तब उसको Memory OS दे देता है (Process का मतलब है एक Task या फिर एक छोटा काम जो की Computer के अंदर होता है)
            • जब Process अपना काम ख़तम कर लेती है तो OS वापस अपनी Memory ले लेता है.
            1. Basic Application of Computer  
            2. Classification of Computer

              2. Processor Management (Process Scheduling)

                जब Multi Programming Environment की बात की जाये तो OS Decide करता है, की किस Process को Processor मिलेगा और किसको नहीं मिलेगा और कितने समय तक मिलेगा.
                इस Process को बोला ज्याता है Process Scheduling. Operating System ये सब काम करवाता है.
            • Operating System ये भी देखता है Processor खाली है या फिर कुछ काम कर रहा है, या Free है और Process अपना काम ख़तम कर लिया है या नहीं. आप चाहो तो Task Manager में जाक देख सकते हो की कितने काम चल रहे हैं और कितने नहीं. जो Program ये सब काम करवा ता है, उसका नाम है Traffic Controller.
            • Process को CPU Allocate करता है.
            • जब एक Process का काम ख़तम हो ज्याता है, तो वो Processor को दुसारे काम में लगाता है, और कुछ काम नहीं होने पर Processor को Free कर देता है.
            1. IT Gadgets and their applications
            2. Basics of Hardware & Software
            3. Computer Memory & Storage

               3. Device Management

                   आप के Computer में Driver का इस्तेमाल तो होता है, जैसे की Sound Driver, Bluetooth Driver, Graphics Driver, WiFi Driver लेकिन ये अलग-अलग Input/Output Device को चलाने में मदद करते हैं, लेकिन इन Drivers को OS चलता है.
              • सभी Computer Devices को Track करता है और ये Task जो करवाता है उस program का नाम है I/O Controller.
              • जैसे अलग अलग Process को Devices चाहिए कुछ Task करेने के लिए, तो device Allocate का काम भी OS करता है. एक उदहारण ले ले ते हैं एक Process को कुछ Task करने है जैसे video play करना, Print निकाल ना, तो ये दोनों Task Output device Monitor, printer की मदद से होगा. तो ये दोनों device को Process को कब देना है ये काम OS करता है.
              • जब Process का काम ख़तम हो ज्याता है तो वो वापस device De allocate करता है.

                 4. File Management

                  एक File में बहुत सारी Directories को संगठन करके रखा ज्याता है. क्यूंकि इससे हम आसानी से data ढूंड सके. अब जानते हैं File Management में OS का क्या काम है.

              • Information, Location और Status को संगठित करके रखता है. ये सब file system देखता है.
              • किसको कोनसा Resource मिलेगा.
              • Resource De-allocate करना है.

                 5. Security

                   जब आप अपना Computer को On करते हो तो आप को वो Password पूछता है, इसका मतलब ये है की OS आपके System को Unauthenticated Access से रोकता है. इससे आपका Computer सुरक्षित रहता है. और कुछ program को बिना password के आप open नहीं कर सकते है.

                6. System Performance देखना

              ये Computer के Performance को देखता है और system को Improve करता है. OS एक service देने में कितना समय लगाता है, ये रिकॉर्ड करके रखता है.

                 7. Error बताना

                  अगर System में बोहत सारे error आ रहे है तो उनको OS Detect करता है और Recover करता है.

                 8. Software और User के बिच में तालमेल बनाना

              • Compiler, Interpreter और assembler को Task assign करता है. अलग अलग Software को User के साथ जोड़ता है, जिस से user Software को अछे से इस्तेमाल करता है.
              • User और System के बिच में Communication प्रदान करता है.
              • Operating System BIOS में Store होके रहता है. बाकि सब application को भी user-friendly बनाता है.
              1. Software
              2. Open Source & Proprietary Software
              3. Mobile Apps

                 ऑपरेटिंग सिस्टम की विशेषताएं

              • एक Operating System बोहत सारे Program के Collection है, जो की दुसारे program को चला ता है.
              • ये सारे Input/output Device को Control करता है.
              • सारे application software run करने की responsibility Operating system की है.
              • Process Scheduling का काम मतलब Process allocate करना और de allocate करना.
              • System में हो रहे errors और खतरों के बारे में अवगत कराता है.
              • User और Computer Programs के बीच अच्छा तालमेल स्थापित करता हैं.